सोमवार, 20 अप्रैल 2009

नगर में मेरा घर जलाने से पहले


दोस्तों, आज से मैंने भी ब्लॉग की दुनिया में कदम रखा। मेरे पिताजी डॉ शिवरतन लाल 'बर्क पुन्छ्वी ' एक शायर है। प्रस्तुत है उनके कुछ शेर -



दिलो जा किसी पर लुटाने से पहले
इजाजत तो ले लो ज़माने से पहले।
जरा सोच ले तू भी जल न जाए ,
नगर में मेरा घर जलाने से पहले।
हवाओ की हमदर्दियाँ कर ले हासिल,
दीया आंधियो में जलाने से पहले।
कुछ आंसू भी आँखों में अपनी बचा रख
मोहब्बत में तू मुस्कुराने से पहले।
जरा बिजलियो से भी समझौता कर लें,
चमन में नशेमन बनाने से पहले।
बर्क पुन्छ्वी
(क्षमा चाहूँगा मात्रा की कुछ गलतियो के लिए , ये टेक्निकल समस्या है)